देश में ग्रामीण सड़कों के निर्माण के लिए विश्व बैंक ने डेढ़ अरब डॉलर (लगभग 6,800 करोड़ रुपये) की सहायता मंजूर की है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत बनने वाली सड़कों के लिए इस राशि का इस्तेमाल होगा। देश में सड़क निर्माण के लिए विश्व बैंक से मिलने वाली यह अब तक की सबसे बड़ी मदद है। इस मदद को लेकर विश्व बैंक और केंद्र सरकार के बीच शुक्रवार को एक समझौते पर हस्ताक्षर हुए। भारत के दौरे पर आए विश्व बैंक के अध्यक्ष रॉबर्ट जोएलिक और केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी के बीच बैठक के बाद इस समझौते पर सहमति बनी। इससे पहले जोएलिक ने सुबह प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से भी मुलाकात की। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत बनने वाली करीब 24,000 किलोमीटर सड़कों के लिए इस राशि का इस्तेमाल होगा। ये सड़कें उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, पंजाब, राजस्थान और मेघालय में बननी हैं। इसके अलावा अगले पांच साल में इस योजना में शामिल होने वाले किसी भी राज्य को इस राशि से मदद दी जाएगी। इन सड़कों से सीधे साठ लाख लोगों को फायदा पहुंचेगा। इस मौके पर जोएलिक ने कहा कि बुनियादी ढांचे का निर्माण ही देश के समस्त लोगों को आगे बढ़ने का अवसर प्रदान करेगा। सड़के किसी भी देश की जीवन रेखा हैं। न केवल यह लोगों की आमदनी बल्कि बाजार तक उनकी पहुंच को भी आसान बनाती है। दूसरी तरफ वित्त मंत्री ने कहा कि अब तक प्रधानमंत्री ग्राम सड़क परियोजना के तहत 3,75,000 किलोमीटर नई सड़कों का निर्माण हो चुका है। इसके अलावा 40 अरब डॉलर की लागत से 3,72,000 किलोमीटर लंबी सड़कों को सुधारा जा चुका है। सड़क निर्माण के अलावा विश्व बैंक और केंद्र सरकार के बीच चक्रवात से होने वाले नुकसानों को कम करने वाले राष्ट्रीय कार्यक्रम को मदद देने वाला एक समझौता भी हुआ है। खासतौर से उड़ीसा और आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों में रहने वाले करीब दस लाख लोगों को इस कार्यक्रम के जरिए मदद मिलेगी। इस कार्यक्रम के लिए विश्व बैंक 25.50 करोड़ डॉलर उपलब्ध कराएगा। वैसे इस कार्यक्रम से 13 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों को मदद मिलेगी। वित्त मंत्री ने इस कार्यक्रम के बारे में बताया कि इस कार्यक्रम के महत्व का अंदाज इसी बात से लगाया जा सकता है कि देश की करीब आधी आबादी तटीय इलाकों से किसी न किसी तरह जुड़ी हुई है। उत्तराखंड-राजस्थान को भी दी जाएगी सहायता विश्व बैंक ने उत्तराखंड और राजस्थान के लिए 17.06 करोड़ डॉलर (लगभग 800 करोड़ रुपये) की मदद मंजूर की है। यह मदद राजस्थान के 17 जिलों में करीब चार लाख गांवों को मिलेगी। इसके अलावा उत्तराखंड में चल रहे वाटरशेड कार्यक्रम की वित्त पूर्ति भी इस सहायता से होगी। विश्व बैंक के मुताबिक इस राशि में से राजस्थान को 16.27 करोड़ डॉलर की मदद मिलेगी। जबकि उत्तराखंड को 79.8 लाख डॉलर मिलेंगे। राजस्थान के ग्रामीण इलाकों में इस मदद से जीवकोपार्जन से जुड़े कार्यक्रम चलाए जाएंगे। यह कार्यक्रम खास तौर पर महिलाओं और गरीबों के लिए होंगे। जहां तक उत्तराखंड को मिलने वाली वित्तीय मदद का सवाल है, इसे वाटरशेड विकास कार्यक्रम पर खर्च किया जाना है। इसका उद्देश्य राज्य के ग्रामीण इलाकों में लोगों की आमदनी में दस प्रतिशत की वृद्धि करना है। यह कार्यक्रम 2004 में शुरू हुआ था।
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