Friday, January 21, 2011

गांव में जाने को बैंकों ने सरकार से मांगा फंड


ग्रामीण इलाकों के करोडों लोगों को बैंकिंग सेवा से जोड़ने की सरकारी मुहिम को भारी झटका लगा है। देश के बैंकों ने केंद्र को अपनी मौजूदा वित्तीय स्थिति का हवाला देते हुए कहा है कि उनके लिए सरकार की इन योजनाओं पर अतिरिक्त धनराशि खर्च करना मुश्किल है। इन बैंकों का कहना है कि अगर सरकार को अपनी इस तरह की स्कीमों को लागू करना है तो उसका वित्तीय बोझ भी उसे उठाना पड़ेगा। वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने मंगलवार को देश के बैंकों व वित्तीय संस्थानों के प्रमुखों के साथ बैठक की। वैसे यह बैठक बजट पूर्व होने वाली चर्चा के लिए बुलाई गई थी, लेकिन बैंकिंग क्षेत्र की तमाम समस्याओं पर भी विचार-विमर्श हुआ। बैंकों का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्र में बैंकिंग सेवा पहुंचाने के लिए सरकार का दबाव काफी बढ़ गया है। लेकिन बैंकों को इस कार्य के लिए काफी ज्यादा निवेश करने की दरकार है। दूसरी तरफ बैंकों की वित्तीय स्थिति ऐसी नहीं है कि वे तकनीकी क्षेत्र पर भारी भरकम निवेश कर सके। बैंकों के पास अभी नकदी का अभाव है। पिछले वर्ष केंद्र सरकार ने दो हजार से ज्यादा आबादी वाले देश के 62 हजार गांवों को बैंकिंग सेवा से जोड़ने की एक योजना तैयार की है। यह योजना बैंकों को 31 मार्च, 2012 तक लागू करनी है। चालू वित्त वर्ष 2010-11 के दौरान बैंकों ने इस दिशा में काफी सीमित पहल की है। इसलिए बैंक चाहते हैं कि वित्त मंत्री आगामी आम बजट में इस कार्य के लिए उन्हें राशि मुहैया कराएं, ताकि बैंकिंग सेवाओं का विस्तार तेजी से हो सके। बैंकों के साथ ही बीमा कंपनियों ने भी सरकार की लोकलुभावन बीमा नीतियों को लागू करने में फंड की किल्लत का रोना रोया। बैठक में शामिल सरकारी क्षेत्र की बीमा कंपनियों ने कहा कि स्वास्थ्य बीमा और पेंशन योजना को पूरे देश में लागू करने के लिए काफी निवेश की जरूरत है। वित्त मंत्री को इसके लिए आगामी बजट में प्रावधान करना चाहिए। इन बीमा कंपनियों के भरोसे ही केंद्र सरकार फसल बीमा, स्वास्थ्य बीमा, असंगठित क्षेत्र के लिए पेंशन योजना जैसी नीतियों को लागू कर रही है। वैसे बैठक को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री ने कहा है कि गरीबों को बेहतर जीवनयापन देने के लिए उन तक पेंशन, बीमा, बैंकिंग जैसी वित्तीय सेवाएं पहुंचाना सरकार के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। बैठक में भारतीय स्टेट बैंक के चेयरमैन ओपी. भट्ट, पीएनबी चेयरमैन केआर. कामथ, यूको बैंक के सीएमडी अरुण कौल, जीवन बीमा निगम के चेयरमैन टीएस. विजयन तथा कई अन्य बैंकों व बीमा कंपनियों के प्रमुख शामिल थे।


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