Sunday, January 16, 2011

4 माह से अटकी 85 श्रमिकों की दिहाड़ी

मनरेगा के तहत बेगारी करनी पड़ेगी यह कल्पना किसी ने नहीं की थी। अलीगढ़ जिले में तो काम करने के चार माह बाद भी 85 मजदूरों का 1.32 लाख रुपये की मजदूरी अटका पड़ी है। भुगतान के लिए भटक रहे ग्रामीण तत्कालीन महिला प्रधान के घर के चक्कर काट रहे हैं। उच्चाधिकारियोंसे शिकायत करने से खफा खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) मजदूरों के काम को श्रमदान घोषित करने की धमकी दे रहे हैं। जिले के टप्पल ब्लाक के खेडि़या खुर्द गांव में ग्राम प्रधान ने सितंबर, 2010 में मनरेगा योजना के तहत कुछ काम कराया गया था। तत्कालीन ग्राम प्रधान कल्पना देवी ने मजदूरों से काम तो करा लिया, मगर जिला ग्राम्य विकास अभिकरण व टप्पल के बीडीओ ने पैसा नहीं भेजा। सो, 85 मजदूर को मजदूरी ही नहीं मिली। नवंबर में प्रधान पति ने यह मामला विकास विभाग के अफसरों तक पहुंचाया तो भुगतान का आश्वासन मिला लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इस बीच प्रधानी के चुनाव हो गए और यह पद दूसरे के पास चला गया। अब मजदूर पूर्व प्रधान के घर के चक्कर काट रहे हैं। ब्लाक स्तर पर बीडीओ भी पल्ला झाड़ रहे हैं। पूर्व प्रधान पति का आरोप है कि मजदूरों का पैसा भेजने के लिए कमीशन मांगा गया था। न देने पर यह अटक गया। अब मामला काफी पुराना हो गया है और अफसर सुन ही नहीं रहे।

No comments:

Post a Comment