Friday, January 7, 2011

32 लाख को ठंड से बचाने का बजट 3 लाख

मुरादाबाद, 960 ग्रामों की 32.5 लाख आबादी और अलाव जलवाने के लिए मात्र तीन लाख रुपये-सुनने में बात अटपटी लगने वाली यह बात सोलह आने सच है। जिले में ठंड से निबटने के सटीक सरकारी मद का यही हाल है। राहत के सीधे खर्च की बात करें तो एक गांव के हिस्से में 332 रुपये ही आते हैं। प्रति व्यक्ति यह आंकड़ा 11 रुपये से भी कम बैठता है। यूं तो नगर निगम ने महानगर में 10 स्थानों पर अलाव की व्यवस्था शुरू कराई है लेकिन 31 दिसंबर की रात कंबल बांटने निकले डीएम सुभाष शर्मा को ही कई अलाव नदारद मिले। लगभग कागजी अलाव जैसी ही स्थिति जिले से तहसीलों और कस्बों तक जाने वाली सरकारी राहत की लंबी चेन की है, जहां एकमुश्त मोटे बजट की झलक दिखाने वाली सरकारी राहत अंतिम आदमी तक पहुंचते-पहुंचते ऊंट के मुंह में जीरा सरीखी हो जाती है। जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में अलाव जलवाने के लिए तीन लाख रुपये का भारी-भरकम बजट है। जिसे सभी छह तहसीलों में बराबर-बराबर यानी 50-50 हजार रुपये में बांट दिया गया है। इस मामूली से बजट को ग्रामीण क्षेत्र में ही बांटा जाए, तो जिले में 960 ग्राम पंचायतें हैं। छोटे मजरों की गिनती की जाने पर संख्या डेढ़ गुनी हो जाती है। जनगणना के ताजा आंकड़ों के मुताबिक मुरादाबाद जिले के ग्रामों में 3257762 आबादी निवास करती है। यानी एक गांव के हिस्से में अलाव जलाने को आए 332 रुपये। जाहिर है कि छह दिन में जिले में तीन लाख रुपये बराबर हो जाएंगे। ऐसी ही स्थिति कंबल वितरण की है। वैसे तो ठंड में गरीबों को बांटे जाने वाले सरकारी कंबलों का लॉट अभी आया ही नहीं है लेकिन डीएम ने अपने स्तर व निजी संस्थाओं की मदद से 31 दिसंबर की रात महानगर में कई जगह कंबल के साथ पालीथिन शीट का वितरण किया। इससे चंद शहरी बेघरों को तो राहत मिल गई लेकिन दूर-दराज बसने वाले गरीब इस ठंड में भी धरती का बिछौना बनाकर आकाश ओढ़ रहे हैं। इनके पास कचरे, पुराने टायर-रबड़ आदि जलाकर प्रदूषित धुएं के साथ ठंड बचाने के अलावा कोई विकल्प नहीं होता।

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