Sunday, January 16, 2011

विकास न होने से बिहार का एक गांव हुआ अछूत

बिहार में जमुई जिले के असूठा ग्राम पंचायत का हरदिया पड़रिया गांव नक्सली गतिविधियों और विकास कार्यो में पिछड़ने के चलते अछूत सा दर्द भोग रहा है। चांदन ब्लाक के इस गांव के लोग बेटे-बेटियों की शादी गांव में ही करते को मजबूर हैं, क्योंकि आसपास के गांव वाले भी यहां के लोगों से रिश्ता नहीं करते। ग्रामीणों का कहना है कि आजादी के बाद से आज तक एक बार बीडीओ गांव आए हैं। गांव में थोड़ा सा भी विकास कार्य होता तो यह स्थिति नहीं होती। ग्रामीणों ने बताया कि पगडंडी के सहारे छह किलोमीटर यात्रा तय करने पर कच्ची सड़क मिलती है। ऐसे में कौन गांव बारात लेकर आयेगा और दुल्हन लेकर जायेगा। कोई बेटी वाला भी हमसे रिश्ता नहीं जोड़ना चाहता। उन्होंने बताया कि घटवाल, आदिवासी, प्रमार, नैया एवं तुरी जाति के दो सौ परिवार वाले इस गांव में इंदिरा आवास जैसी योजनाओं का लाभ किसी को मिला ही नहीं। अभी भी लोग खाट पर मरीज लेकर दस किमी दूर अस्पताल जाते हैं। नक्सलियों के भय के चलते गांव में आज तक एक हैंडपंप नहीं लगाया गया। लोग माटी खोद कर कच्चे कुएं से प्यास बुझाते हैं। ग्रामीणों की मानें तो यहां आजादी के बाद से अब तक एक बार बीडीओ के पैर पड़े हैं। हां चुनाव के समय ही पुलिस के साथ कुछ चुनाव कर्मी यहां पहुंचते हैं। जनप्रतिनिधि भी इस गांव में विरले ही पहुंचते हैं। चांदन ब्लाक के खंड विकास अधिकारी ने स्वीकारा कि गांव में विकास कार्य हुए ही नहींहै।


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