महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी (मनरेगा) व मिड-डे-मील योजनाओं के क्रियान्वयन में गंभीर खामियों को देखते हुए संसद की लोक लेखा समिति ने नियंत्रक महालेखा परीक्षक (सीएजी) से दोबारा गहन आडिट करने को कहा है। समिति ने कैग से यह भी कहा है कि वह संबंधित मंत्रालय से मिलकर ऐसी प्रणाली विकसित करे, जिससे हेराफेरी पर अंकुश लगाने के साथ इसकी मौजूदा खामियों को दूर किया जा सके। अभी राज्यों से प्राप्त रिपोर्ट के आधार पर ऑडिट होता है। समिति ने विभिन्न मंत्रालयों की अनुदान मांगों के बाद भी ज्यादा खर्च पर चिंता जताई है। पीएसी के लिए बुधवार का दिन बेहद कामकाज वाला रहा। दो चरणों में हुई बैठकों में सुबह के सत्र में समिति ने पांच रिपोर्टो पर चर्चा की। इनमें दवा व चिकित्सा उपकरण खरीद व सेबी से जुड़ी निवेशकों के धन संबंधी रिपोर्ट को समिति ने अपनी मंजूरी दी। इसके साथ तीन मामलों में अनुदान मांगों के बाद भी ज्यादा खर्च करने, मनरेगा के क्रियान्वयन व मिड-डे-मील या मध्यान्ह भोजन योजना की खामियों पर की गई कार्रवाई रिपोर्ट (एटीआर) पर भी समिति ने मुहर लगाई। शाम के सत्र में 2जी मामले पर चर्चा की गई। बैठक के बाद समिति के अध्यक्ष डॉ. मुरली मनोहर जोशी ने कहा कि समिति ने जिन तीन एटीआर को मंजूरी दी है उनमें मंत्रालयों में अनुदान मांगों के ज्यादा खर्च पर चिंता जताई गई है, जबकि अन्य दो मामलों में कैग को फिर से गहन आडिट करने को कहा है। डॉ. जोशी ने कहा है कि मिड-डे-मील योजना में कई राज्यों से ठीक से जानकारियां नहीं मिल रही हैं। कैग को कहा है कि वह अपने आडिट में इस बारे में पता लगाए। मध्यान्ह भोजन योजना का आडिट राज्य करते हैं, लेकिन समिति चाहती है कि इसे कैग मंत्रालय के साथ मिलकर करे। समिति ने कैग को यह भी बताया है कि वह किस तरह से और ज्यादा सटीक आडिट कर सकता है। मनरेगा के बारे में उन्होंने कहा कि वहां पर इस तरह की आडिट प्रणाली की और ज्यादा जरूरत है।
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