फूस की झोपडि़यां, घरों के ठंडे चूल्हे, चिथड़ों में लिपटे भूख से बिलबिलाते बच्चे। अशिक्षा, गरीबी और बेरोजगारी की ये जिंदा तस्वीरें हैं यूपी के उन 24 गांवों की, जो बिहार के नक्सल प्रभावित जिलों से सटे हुए हैं। उत्तर प्रदेश सरकार ने आठ साल पहले इस उद्देश्य से इन गांवों को नक्सली गांव घोषित कि अतिवादी यहां पांव न पसार सकें। अशिक्षित, गरीब और बेरोजगार ग्रामीणों को विकास की मुख्यधारा में शामिल करने की योजना बनाई। हालांकि योजनाओं को कागजों में लागू भी दिखा दिया लेकिन क्रियान्वयन की धीमी रफ्तार से योजनाएं तमाशा बन कर रह गयीं। बिहार सीमा पर आबाद सिद्धार्थ नगर जिले के 24 गांवों को शासन ने 2002-03 में नक्सल प्रभावित घोषित कर दिया। साथ ही ग्रामीणों के विकास के लिए कई योजनाएं भी बना डालीं। सरकार ने 2010-11 में इन्हें अंबेडकर गांवों की सूची में डालकर पूर्ण रूप से विकसित करने का आदेश दिया, जिन पर सिर्फ कागजों पर ही अमल हुआ। जिले के बनकटा ब्लाक के भटहीं भट गांव के हालात बताते हैं कि अधिकारियों और कर्मचारियों ने सिर्फ कागजों में ही विकास किया है। गांव के 35 परिवार बदहाली में गुजर कर रहे हैं। इन्दल, मुस्तफा, अमर, मैनूद्दीन, रोशन, सोवराती फूस के घरों में रहते हैं। गांव में नाली, खड़ंजा का नामोनिशान नहीं है। संपर्क मार्ग तक की हालत खराब है। राशन कार्ड के अभाव में इन परिवारों को अनाज नहीं मिलता। कुछ ऐसा ही हाल पथरदेवा ब्लाक के लोहरौली, भटनी के बलुआ अफगान, रायबारी, बनकटा के राजपुर, कोरयां, कटहरयिा, सिरसिया पवार, बांसदेव उर्फ गोबराई, टोला अहिबरन राय, रामपुर बुजुर्ग, विशुनपूरा, रामपुर कोठी, छपरा दुबौली, भाटपाररानी ब्लाक के कटघरा, तिलौली तथा लार विकास खण्ड के बनकटा अमेठिया, मंझरिया, अमरीचक, महुजा, मेहरौना व चुरिया की है। कठघरा में रमेशर, सितलू, बदरी का बीपीएल कार्ड नहीं है। बांसदेवपुर उर्फ गोबराई में सुभावती को विकलांग पेंशन, रुनिया, लक्ष्मीना, जमुनी, रमदेइया को विधवा पेंशन नहीं मिला। इंदिरा आवास के लिये अनारकली व रुकमीना भटक रही है। सिरसिया पवार में विधवा पेंशन व आवास के लिये एक दर्जन से अधिक लोग भटक रहे हैं। यहां दलित बस्ती तक में नाली की सुविधा नहीं है। रामराज, नगीना, रामायण, सुदामा, बदरी, हबीब सहित दर्जनों लोगों ने बताया कि गांव में किसी भी विभाग का कोई अधिकारी नहीं आता है। जिलाधिकारी जुहेर बिन सगीर ने कहा, वित्त वर्ष 2011-12 के लिये अंबेडकर गांवों का चयन होना बाकी है। उन्होंने कहा, नक्सल प्रभावित गांवों में सप्ताह भीतर ब्लाक स्तर पर कैंप लगाकर सभी तरह के पेंशनरों को लाभान्वित करने का खाका तैयार कर लिया गया है।
No comments:
Post a Comment