यूपी के ज्यादातर जिलों में मनरेगा के मजदूरों को न काम मिला और न ही बेरोजगारी भत्ता। यह समस्या ज्यादातर जिलों में है। राज्य सरकार की ढिलाई की वजह से ग्रामीण बेरोजगारों को भत्ते का भुगतान नहीं हो पा रहा है। केंद्र सरकार ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच कराने का फैसला किया है। राज्य के 66 जिलों में बेरोजगारी भत्ते का लगभग साढ़े पांच करोड़ रुपये बकाया है। मुख्यमंत्री मायावती के गृह जनपद बुलंदशहर और केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्य मंत्री प्रदीप जैन के जिला झांसी में भी ग्रामीण बेरोजगारों को मांगने पर काम नहीं दिया गया है। राज्य के जिन जिलों में 10 लाख रुपये से अधिक का मनरेगा मजदूरों का बेरोजगारी भत्ता बकाया है, उनमें इलाहाबाद, औरैया, आजमगढ़, बाराबंकी, बस्ती, चंदौली, देवरिया, फैजाबाद, गाजीपुर, गोरखपुर, जौनपुर, झांसी, लखनऊ, महाराजगंज, मुरादाबाद, संत कबीरनगर, शाहजहांपुर, सीतापुर और सुल्तानपुर के नाम प्रमुख हैं। योजना में मांगने के बावजूद काम न मिलने पर मजदूरों को बेरोजगारी भत्ते के भुगतान का प्रावधान है। यह भुगतान राज्य सरकार को अपने खजाने से करना होता है। ग्रामीण विकास मंत्रालय के अनुसार चालू वित्त वर्ष के दौरान हरदोई में 6 लाख के मुकाबले सिर्फ 1600 रुपये, महराजगंज में 13 लाख के मुकाबले केवल 200 रुपये और श्रावस्ती में 3.6 लाख रुपये के मुकाबले 1500 रुपये भुगतान किया गया है। वाराणसी, मथुरा, फर्रुखाबाद, गाजियाबाद और अलीगढ़ में हालांकि कोई बेरोजगारी भत्ता बकाया नहीं है, लेकिन ग्रामीण विकास मंत्रालय का मानना है कि इन जिलों में काम मांगने वालों के अनुरोध दर्ज नहीं ही नहीं किए गए हैं। इसकी भी जांच कराई जाएगी। केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्यमंत्री प्रदीप जैन ने राज्य के कई जिलों का दौरा कर योजना की समीक्षा की, जिसमें बहुत गड़बडि़यां मिली हैं। उन्होंने इसकी जांच कराए जाने की घोषणा की है। जैन ने पिछले सप्ताह मथुरा व मुरादाबाद में गड़बडि़यां पाई। यहां सिर्फ दो फीसदी मजदूरों को काम मिला है। सोशल ऑडिट कराया ही नहीं गया। मुरादाबाद जिले में 1.45 लाख मजदूरों के जॉब कार्ड बनाए गए हैं, लेकिन सिर्फ 16 फीसदी कार्ड पर फोटो लगे हैं। इनमें काम मांगने वालों का कोई जिक्र नहीं किया गया है। यहां प्रशासनिक खर्च निर्धारित 6 फीसदी के मुकाबले 8.50 फीसदी किया गया है। मनरेगा के बजट से 40 फीसदी सामग्री खरीदी जा सकती है, लेकिन जिले की 50 फीसदी पंचायतों में 46 फीसदी से अधिक राशि खर्च की गई है।
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