Friday, February 11, 2011

ग्रामीण बैंकों को 1100 करोड़ की पूंजी

नाबार्ड के साथ मिलकर 100 करोड़ के निर्माण कोष को मंजूरी



सरकार ने क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों की माली हालत मजबूत बनाने की कवायद को आगे बढ़ाते हुए उन्हें 1100 करोड रुपए की शेयर पूंजी उपलब्ध कराने के प्रस्ताव को आज मंजूरी दे दी। प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में इस बारे में एक प्रस्ताव स्वीकृत कर दिया गया। इससे क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों की ऋण देने की क्षमता बढ़ेगी। सूचना एवं प्रसारण मंत्री अंबिका सोनी ने बैठक के बाद इसकी जानकारी देते हुए कहा कि केन्द्र सरकार का हिस्सा व्यय विभाग द्वारा 2010- 11 और 2011-12 में किए गए प्रावधान के अनुसार जारी किया जाएगा। उन्होंने कहा कि हालांकि, केन्द्र सरकार का हिस्सा राज्यों और प्रायोजक बैंक के हिस्से के अनुरुप ही जारी किया जाएगा।

देश में इस समय 82 क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक हैं। इनमें केन्द्र सरकार 50 प्रतिशत, राज्य सरकार 15 प्रतिशत और प्रायोजक बैंक 35 प्रतिशत का हिस्सेदार है। इसलिए केन्द्र ने कहा है कि वह राज्यों और प्रायोजक बैंक द्वारा अपने हिस्से की राशि जारी करने के अनुपात में ही वह राशि जारी करेगा।

सरकार ने रिजर्व बैंक के डिप्टी गवर्नर डा. के.सी. चक्रवर्ती की अध्यक्षता में क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों की स्थिति जायजा लेने के लिए एक समिति गठित की थी। समिति ने बैंकों की जोखिम पूंजी प्रावधान को मार्च 2011 तक सात प्रतिशत और मार्च 2012 तक नौ प्रतिशत तक बढ़ाने की सिफारिश की थी। समिति के अनुसार 82 क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों में से 40 बैंकों को 2,200 करोड रुपए की पूंजी की आवश्यकता होगी। यह राशि 2010-11 और वर्ष 2011- 12 दो किश्तों में उपलब्ध करानी होगी।

मंत्रिमंडल ने इसके अलावा 100 करोड़ रुपए के एक क्षमता निर्माण कोष को भी मंजूरी दी है। यह कोष नाबार्ड के साथ मिलकर बनाया जाएगा। इससे क्षत्रीय ग्रामीण बैंकों में कर्मचारियों को नाबार्ड तथा अन्य प्रमुख संस्थानों में प्रशिक्षित किया जाएगा। इसके अलावा 700 करोड रुपए का एक और आपात कोष बनाने को भी मंजूरी दी गई है। इससे विशेषतौर पर पूर्वोत्तर और पूर्वी क्षेत्र के कमजोर क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों की जरुरतों को पूरा किया जाएगा। इसके लिए जब भी जरुरत होगी बजट में प्रावधान किया जाएगा। विज्ञप्ति में कहा गया है कि प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण के लिए नाबार्ड द्वारा कार्ययोजना तैयार की जाएगी जिसे केन्द्र को मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने वर्ष 2009 में क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों की समीक्षा करने के बाद डा. के.सी चक्रवर्ती समिति का गठन किया था। समिति के अनुसार 42 क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को नई पूंजी की जरुरत नहीं होगी और बैंक 31 मार्च 2012 तक अपनी जोखिम पूंजी के समक्ष उपलब्ध पूंजी अनुपात (सीआरएआर) को 9 प्रतिशत पर बनाए रखने में सफल होंगे।

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