Monday, February 7, 2011

देश के साथ विदेश में भी जमाई है यहां के होनहारों ने धाक


पूर्वांचल में है एक ग्लोबल विलेज
सच्चर कमेटी की रिपोर्ट में मुसलमानों के पिछड़ेपन पर खूब फोकस किया गया है। वहीं डुमरियागंज का हल्लौर गांव तालीम और तरक्की में उदाहरण बनता जा रहा है। ग्लोबल विलेजका दर्जा हासिल करने वाला हल्लौर गांव शायद पूर्वांचल का अकेला गांव है।
करीब 500 घरों वाले इस गांव में प्राइमरी से लेकर दुनिया के नामी विश्वविद्यालयों तक 250 से ऊपर शिक्षक शिक्षा की अलख जगा रहे हैं। एक खास बात जो इस गांव को सबसे अलग करती है वह यह कि हल्लौरी दुनिया के चाहे जिस कोने में हों अपने गांव की तरक्की को मिशन बना रखा है। इसके लिए उन्होंने गांव की एक बहुत ही रिच वेबसाइट बना रखी है और इसी के जरिये गांव की बेहतरी का ताना बाना बुन रहे हैं।
400 साल पहले अस्तित्व में आए इस गांव की दो दर्जन ऐतिहासिक धरोहरों को इन लोगों ने जिस खूबसूरती से संजो रखा है वह काबिले तारीफ है। सरसरी तौर पर आकलन किया जाए तो गांव के लोग साल भर में विभिन्न धार्मिक आयोजनों और त्योहारों पर 50 लाख से ऊपर खर्च करते हैं। गांव के विकास के प्रस्ताव नेट के माध्यम से अफसरों तक पहुंचते हैं। डुमरियागंज से बढ़नी जाने वाले रोड पर महज तीन किमी पर स्थित हल्लौर गांव अपने आप में अनोखा है। 95 फीसदी मुस्लिम आबादी वाले इस गांव के हर घरों में बच्चों को शिक्षित बनाने पर विशेष ध्यान दिया जाता है। यही कारण है दस हजार की आबादी वाले इस गांव में ढाई सौ से भी अधिक शिक्षक हैं। इसमें करीब 145 प्राइमरी और जूनियर, 60 मदरसा मख्तब, इंटर कालेज में 20, डिग्री कालेज में 37 शिक्षक शामिल हैं।
इसके अलावा इस गांव के 38 लोग लंदन, शारजाह सउदी अरब, दुबई, मस्कट व मध्य अफ्रीकी देशों में अपनी प्रतिभा का परचम लहरा रहे हैं और गांव से बहुत शिद्दत के साथ जुड़े हैं। पुरुषों के साथ साथ महिलाओं ने भी कदम से कदम मिलाकर शिक्षा के क्षेत्र में अपना अलग मुकाम बनाया है। गांव में महिला शिक्षकों की तादात भी दो दर्जन से अधिक है। गांव के डा. सैय्यद मोहम्मद रिजवी जो अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में गणित के प्रोफेसर थे अब वे सउदी अरब के मदीना विश्वविद्यालय में पिछले तीन साल से बतौर रीडर तैनात हैं। वहीं के प्रो. सैय्यद अकबर जमील रियाद यूनिवर्सिटी में अपने माटी की खुशबू बिखेर रहे हैं। प्रो. जमील वहां अंग्रेजी पढ़ाते हैं। इसके अलावा इंजीनियरिंग, चिकित्सा, एमबीए के क्षेत्र में यहां की युवा पीढ़ी तेजी से बढ़ रही है।


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