Thursday, February 3, 2011

मनरेगा निगरानी के लिए नया तंत्र


मनरेगा में खामियों और भ्रष्टाचार रोकने के तंत्र को मजबूत करने की जरूरत पर जोर देते हुए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि योजना का आडिट करने के लिए जल्द ही कानून बनेगा। साथ ही पंचायतों में निगरानी के लिए पंचायत विकास अधिकारी और एक जूनियर इंजीनियर की तैनाती होगी। प्रधानमंत्री ने बुधवार को मनरेगा के पांचवीं वर्षगांठ पर आयोजित समारोह में कार्य के आवंटन व मजदूरों को भुगतान में देरी जैसी समस्याओं को दूर करने के लिए प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल की जरूरत भी बताई। समारोह में सोनिया गांधी ने मनरेगा में भ्रष्टाचार व गड़बडि़यों पर गंभीर चिंता जताई। प्रधानमंत्री ने ग्रामीण विकास और पंचायती राज संस्थाओं को मजबूत करने के लिए संयुक्त रूप से कार्य करने के लिए प्रत्येक ग्राम पंचायत में एक पंचायत विकास अधिकारी और एक जूनियर इंजीनियर की नियुक्त करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि माओवाद प्रभावित जिलों में इस योजना को सबसे ज्यादा तरजीह दी जाएगी। इसके पहले चरण में उन जिलों में ये नियुक्तियां की जाएंगी, जिनमें ग्राम विकास के मद में सालाना 100 करोड़ रुपये अथवा इससे अधिक खर्च किया जाता है। सोनिया गांधी की ओर से मनरेगा की खामियों का जिक्र करने पर प्रधानमंत्री ने आश्वस्त किया कि योजना के कार्यो के आडिट के लिए जल्दी ही कानून बनाया जाएगा। ग्राम पंचायतों की भूमिका पर प्रधानमंत्री सिंह ने कहा कि अब वहां के विकास कार्यो की योजना भी वहीं बना करेगी। कार्यो के निर्धारण, निगरानी और बजट आदि जैसे कार्य स्थानीय स्तर पर ही होंगे। इसके पूर्व सोनिया गांधी ने मनरेगा का बजट दूसरे मदों में खर्च करने की खबरों पर चिंता जताते हुए कहा कि फर्जी जॉब कार्ड और कागजों पर ही मस्टर रोल की शिकायतें मिल रही हैं। विकास कार्यो के लिए घटिया सामग्री की खरीद भी चिंता का विषय है। इस मौके पर योजना में उल्लेखनीय कार्य करने वाले प्रधानों और जिलाधिकारियों को पुरस्कृत किया गया।


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