काला पानी की तरह जिंदगी गुजार रहे दिल्ली के बदरपुर खादर गांव की किस्मत खुल गई है। गांव में अब वह सबकुछ होने जा रहा है, जो एक विकसित कस्बे में होता है। बच्चे स्कूल जाएंगे और बीमार होने पर लोगों का इलाज भी होगा, वह भी गांव में। दैनिक जागरण की खबर पर सरकारी मशीनरी जागी और आनन फानन में तैयार कर लिए गांव के विकास की पूरी तस्वीर। इसके लिए सरकार ने चार बीघा जमीन आवंटित कर दी है। शिक्षा विभाग को जिम्मेदारी दी गई है और डीएसआइडीसी को बिल्डिंग बनारी है। बिल्डिंग में समय लगेगा, इसलिए प्राथमिक स्कूल इसी सत्र से टेंट लगाकर शुरू हो जाएंगे। स्वास्थ्य सेवा के लिए स्थायी डिस्पेंसरी खुलेगी। डिस्पेंसरी के लिए सरकार ने दिल्ली नगर निगम को चिट्ठी भी लिख दी है। स्थायी व्यवस्था होने तक गांव में सचल डिस्पेंसरी वैन इसी महीने से शुरू होगी। इसमें तीन दिन दिल्ली सरकार की एवं तीन दिन एमसीडी की वैन सेहत की जांच के लिए जाएगी। स्वच्छ पेयजल के लिए दो मिनी बोरवेल लगाए जाएंगे। इसके अलावा लोगों को एक छत के नीचे लाने के लिए दो बीघे में सामुदायिक भवन/पंचायत घर बनेगा। इसमें तीन बड़े हाल होंगे, जो सार्वजनिक होंगे। इसी में डाक्टर बैठेंगे और फिलहाल डिस्पेंसरी चलेगी। गौरतलब है कि दैनिक जागरण ने 8 मई 2011 को इस मामले को प्रमुखता से उठाया था। दिल्ली सरकार के उत्तर पूर्वी जिला के उपायुक्त जीएल मीणा के मुताबिक स्कूल की बिल्डिंग छोड़ बाकी सभी प्रोजेक्ट मार्च 2012 तक तैयार हो जाएंगे। मुख्य सड़क से गांव को जोड़ती लिंक सड़क को पक्का बनाया जा रहा है। सभी प्रोजेक्ट पूरा हो जाने के बाद इस गांव की तस्वीर पूरी तरह से बदल जाएगी। लोगों को इसका सीधे लाभ मिलेगा।
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