सरकार की कोशिश है कि पंचायतें अधिक से अधिक कम्प्यूटर फ्रेंडली बनें। इससे न सिर्फ हमारी पंचायतें और गांव दुनिया के सम्पर्क में आकर आगे बढ़ेंगे बल्कि यही वह जरिया हो सकता है, गांवों में होने वाले कामकाज का सही ढंग से मूल्यांकन सुनिश्चित करने का। यह बहुत अच्छी बात है कि ओडिसा से लगाकर पंजाब तक 50 हजार पंचायतें कम्प्यूटर के जरिये अपनी बात कहने लगी हैं। इन पंचायतों में हो रहे कामकाज और खर्च के पूरे ब्योरे को इंटरनेट पर देखा जा सकता है। कई राज्यों में काम तो अच्छा हो रहा है पर उससे दूसरे राज्य और गांव परिचित नहीं हैं क्योंकि उनका आपस में संवाद नहीं है। सरकार चाहती है कि एक गांव के अच्छे कामकाज का फायदा दूसरे राज्य भी उठाएं। इंटरनेट इस तथ्य को उजागर करने और दूसरों को प्रोत्साहित करने का बड़ा सशक्त जरिया बन सकता है। इसलिए हम इस दिशा में कदम उठाने जा रहे हैं। हमारी सरकार की तरफ से कोशिश हो रही है कि इस साल के सितम्बर तक देश की सारी की सारी पंचायतें इंटरनेट पर यह बताने लग जाएं कि उन्होंने कौन-कौन सी परियोजनाएं हाथ में लीं और उन्हें कितनी राशि लगा कर कितनी अवधि में पूरा किया? इससे अव्वल तो कामकाज और व्यय मद में पारदर्शिता आएगी। दूसरे, इसके आधार पर उनकी जवाबदेही तय की जा सकेगी। इससे गड़बड़ी तुरंत पकड़ में आ जाएगी। अगले तीन सालों में तो गांवों में काफी बदलाव दिखाई देगा क्योंकि सरकार तब तक सभी गांवों में व्रॉड बैंड उपलब्ध करा देगी। पंचायतों को अधिक सशक्त बनाने की दिशा में तो सरकार लगातार प्रयास कर ही रही है लेकिन सरकार यह भी चाहती है कि गांव में किए जाने वाले कामकाज के सारे फैसले ग्राम सभाओं में ही लिए जाएं। अगर हमारी ग्राम सभाओं की कार्यवाही ठीक से होने लग जाए और उसमें सभी वगरे की पूरी भागीदारी होने लग जाए तो गांवों होने वाली विकास कायरे में काफी हद तक पारदर्शिता आ जाएगी। नीचे तक भेजे गए धन का तभी बेहतर उपयोग हो सकेगा जब हम पारदर्शिता पर जोर देंगे। सरकार ने इसके लिए कई तरह के उपाय किए हैं लेकिन सरकार चाहती है कि जिन लोगों के लिए काम किए जा रहे हैं, वे ही अपने यहां किए गए कामकाज का मूल्यांकन करें। ग्राम सभा की बैठकों को इसलिए महत्त्व दिया जा रहा ताकि गांवों में हो रहे कामकाज पर सबकी नजर रहे। (श्री विलासराव देशमुख के विचार अजय तिवारी की बातचीत पर आधारित)
Thursday, May 5, 2011
पंचायतों का होगा कम्प्यूटरीकरण
सरकार की कोशिश है कि पंचायतें अधिक से अधिक कम्प्यूटर फ्रेंडली बनें। इससे न सिर्फ हमारी पंचायतें और गांव दुनिया के सम्पर्क में आकर आगे बढ़ेंगे बल्कि यही वह जरिया हो सकता है, गांवों में होने वाले कामकाज का सही ढंग से मूल्यांकन सुनिश्चित करने का। यह बहुत अच्छी बात है कि ओडिसा से लगाकर पंजाब तक 50 हजार पंचायतें कम्प्यूटर के जरिये अपनी बात कहने लगी हैं। इन पंचायतों में हो रहे कामकाज और खर्च के पूरे ब्योरे को इंटरनेट पर देखा जा सकता है। कई राज्यों में काम तो अच्छा हो रहा है पर उससे दूसरे राज्य और गांव परिचित नहीं हैं क्योंकि उनका आपस में संवाद नहीं है। सरकार चाहती है कि एक गांव के अच्छे कामकाज का फायदा दूसरे राज्य भी उठाएं। इंटरनेट इस तथ्य को उजागर करने और दूसरों को प्रोत्साहित करने का बड़ा सशक्त जरिया बन सकता है। इसलिए हम इस दिशा में कदम उठाने जा रहे हैं। हमारी सरकार की तरफ से कोशिश हो रही है कि इस साल के सितम्बर तक देश की सारी की सारी पंचायतें इंटरनेट पर यह बताने लग जाएं कि उन्होंने कौन-कौन सी परियोजनाएं हाथ में लीं और उन्हें कितनी राशि लगा कर कितनी अवधि में पूरा किया? इससे अव्वल तो कामकाज और व्यय मद में पारदर्शिता आएगी। दूसरे, इसके आधार पर उनकी जवाबदेही तय की जा सकेगी। इससे गड़बड़ी तुरंत पकड़ में आ जाएगी। अगले तीन सालों में तो गांवों में काफी बदलाव दिखाई देगा क्योंकि सरकार तब तक सभी गांवों में व्रॉड बैंड उपलब्ध करा देगी। पंचायतों को अधिक सशक्त बनाने की दिशा में तो सरकार लगातार प्रयास कर ही रही है लेकिन सरकार यह भी चाहती है कि गांव में किए जाने वाले कामकाज के सारे फैसले ग्राम सभाओं में ही लिए जाएं। अगर हमारी ग्राम सभाओं की कार्यवाही ठीक से होने लग जाए और उसमें सभी वगरे की पूरी भागीदारी होने लग जाए तो गांवों होने वाली विकास कायरे में काफी हद तक पारदर्शिता आ जाएगी। नीचे तक भेजे गए धन का तभी बेहतर उपयोग हो सकेगा जब हम पारदर्शिता पर जोर देंगे। सरकार ने इसके लिए कई तरह के उपाय किए हैं लेकिन सरकार चाहती है कि जिन लोगों के लिए काम किए जा रहे हैं, वे ही अपने यहां किए गए कामकाज का मूल्यांकन करें। ग्राम सभा की बैठकों को इसलिए महत्त्व दिया जा रहा ताकि गांवों में हो रहे कामकाज पर सबकी नजर रहे। (श्री विलासराव देशमुख के विचार अजय तिवारी की बातचीत पर आधारित)
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