Saturday, December 25, 2010

ऐसे कैसे मिल पाएगा गरीबों को रोजगार

दिखावा बनी ग्राम स्वरोजगार योजना
धनराशि होने के बावजूद यूपी में गांवों के गरीबों को स्वर्ण जयंती ग्राम स्वरोजगार योजना का पूरा लाभ नहीं मिल रहा। सरकार ने चालू वित्त वर्ष में जितने समूहों का गठन करके रोजगार मुहैया कराने का लक्ष्य रखा है, उसकी तुलना में नवंबर तक के 8 माह में आधे समूह भी गठित नहीं हो सके हैं। जब 8 महीने में 50 प्रतिशत काम भी नहीं हो सका तो शेष काम चार माह में कैसे पूरा होगा, अंदाजा सहज लगाया जा सकता है।
चालू वित्त वर्ष में 75 हजार स्वयं सहायता समूह गठित करने का लक्ष्य है। इसमें अभी तक करीब 32 हजार ही स्वयं सहायता समूह गठित कर रोजगार दिया जा सका है। परिवारों के आधार पर रोजगार देने की स्थिति जरूर संतोषजनक है। चालू वित्त वर्ष में 4 लाख परिवारों को रोजगार देने का लक्ष्य था उसमें से 60 प्रतिशत परिवारों को नवंबर तक रोजगार उपलब्ध कराया जा चुका है। स्वयं सहायता समूह के माध्यम से रोजगार देने की उपलब्धि 42 प्रतिशत है। निजी परिवारों को रोजगार दिलाने में भी जो अच्छी स्थिति है वह उन तीन दर्जन जिलों के कारण है जिन्होंने 60 से लेकर शतप्रतिशत काम किया है। कई जिले ऐसे हैं जो न तो लक्ष्य की तुलना में चौथाई समूह गठित कर पाए हैं और न ही उपलब्ध धन का आधा हिस्सा खर्च। राज्य सरकार ने चालू वित्त वर्ष में स्वयं सहायता समूहों व परिवारों को स्वरोजगार मुहैया कराने के लिए करीब 573 करोड़ रुपये खर्च करने का लक्ष्य रखा है।
इसमें 505 करोड़ रुपये उपलब्ध भी हैं, लेकिन 288 करोड़ रुपये ही खर्च हो सके हैं।
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(बॉक्स) योजना का सूरतेहाल
इन जिलों में चौथाई समूह भी गठित नहीं: उन्नाव, सीतापुर, प्रतापगढ़, बिजनौर, हाथरस, जालौन, लखीपुरखीरी, मेरठ, बस्ती व बाराबंकी
लक्ष्य का 40 प्रतिशत ऋण नहीं बांट सके : रायबरेली, प्रतापगढ़, सुल्तानपुर, कुशीनगर, संत रविदास नगर, उन्नाव, बिजनौर, सीतापुर और मुरादाबाद
परिवारों को रोजगार देने में फिसड्डी: रायबरेली, प्रतापगढ़, सुल्तानपुर, कुशीनगर, संत रविदास नगर, महोबा, झांसी, बलरामपुर, बस्ती व बदायूं
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एक नजर में योजना
बीपीएल परिवारों को रोजगार में मदद के लिए योजना शुरू की गई है। खर्च का 75 प्रतिशत हिस्सा केंद्र व 25 प्रतिशत राज्य सरकार वहन करती है। सामान्य वर्ग के लाभार्थियों (परिवारों) को लागत का 30 प्रतिशत या अधिकतम 7500 रुपये अनुदान तथा अजा व अजजा वर्ग के लाभार्थी को 50 प्रतिशत या अधिकतम 10 हजार रुपये अनुदान मिलता है।
समूहों की दशा में लागत का 50 प्रतिशत या अधिकतम 1.25 लाख रुपये अनुदान मिलता है। संचालन ग्राम्य विकास विभाग करता है। 

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