गांव में अब भारत की सिर्फ 68.8 फीसदी आबादी बसती है। जनगणना के ताजा आंकड़ों के मुताबिक ग्रामीण इलाकों में जहां 83.3 करोड़ की आबादी रहती है, वहीं शहरी इलाकों में 37.7 करोड़। यह पहला मौका है, जब गांवों में जनसंख्या वृद्धि की रफ्तार घटी है। ताजा जनगणना के मुताबिक देश की शहरी आबादी पिछले दस साल में 27.81 फीसदी से बढ़ कर 31.36 फीसदी तक पहुंच गई है। दूसरी तरफ गांवों की आबादी इस दौरान 72.19 फीसदी से घट कर 68.84 फीसदी रह गई है। यह जानकारी भारत के महापंजीयक की ओर से तैयार की गई शहरी-ग्रामीण जनसंख्या वितरण रिपोर्ट से सामने आई है। महापंजीयक सी. चंद्रमौलि के मुताबिक देश की कुल जनसंख्या वृद्धि में आई गिरावट भी गांवों की वजह से ही संभव हुई है। इस दौरान शहरों की जनसंख्या वृद्धि में कोई कमी नहीं आई है। हालांकि उन्होंने यह भी माना कि इसकी बड़ी वजह गांवों से लोगों का शहरों की ओर पलायन है। सबसे ज्यादा ग्रामीण आबादी वाला राज्य उत्तर प्रदेश है। यहां 15.5 करोड़ लोग गांवों में रहते हैं। जबकि महाराष्ट्र पांच करोड़ शहरी बाबुओं के साथ सबसे ज्यादा शहरी आबादी वाला राज्य है। इस तरह देश की 18.62 फीसदी ग्रामीण आबादी सिर्फ उत्तर प्रदेश में रहती है, जबकि 13.48 फीसदी शहरी आबादी महाराष्ट्र में। ग्रामीण इलाकों में साक्षरता हासिल करने की दर भी शहरी इलाकों के मुकाबले तेजी से सुधरी है। शहरों के मुकाबले साक्षरता वृद्धि दर में यहां दुगना इजाफा आया है। इसी तरह बच्चों में लड़के और लड़कियों के अनुपात के मामले में भी शहरों की स्थिति गांवों के मुकाबले बिगड़ी है।
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