Saturday, July 16, 2011

मोदी सरकार असंगठित मजदूरों का पंजीकरण करे – कोर्ट

अहमदाबाद, एजेंसी : गुजरात हाई कोर्ट ने नरेंद्र मोदी सरकार को राज्य के सभी असंगठित मजदूरों के पंजीकरण करने और उनके लिए सामाजिक सुरक्षा बोर्ड (एसएसबी) गठित करने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने सरकार को मामले की 26 जुलाई को होने वाली अगली सुनवाई तक निर्देशों के अनुपालन की एक रिपोर्ट भी पेश करने को कहा है। अदालत ने राज्य सरकार को असंगठित मजदूर सामाजिक सुरक्षा (यूडब्ल्यूएसएस) अधिनियम, 2008 के तहत योजनाओं को अधिसूचित करने का भी आदेश दिया है। मुख्य न्यायाधीश एसजे मुखोपाध्याय और न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला की खंडपीठ ने एक जनहित याचिका पर पिछले हफ्ते यह आदेश जारी किए। याचिका असंगठित मजदूरों के लिए काम कर रहे गैरसरकारी संगठन (एनजीओ) वृहद अहमदाबाद आदिवासी भील शिक्षित युवक मित्र मंडल ने दायर की थी। अदालत ने कहा कि लगता है कि यूडब्ल्यूएसएस अधिनियम की धारा (6) के अंतर्गत राज्य सामाजिक सुरक्षा बोर्ड का गठन नहीं किया गया है। एसएसबी की अनुपस्थिति में असंगठित क्षेत्र के मजदूरों के मुद्दे और पंजीकरण की प्रक्रिया की प्रगति पर नजर करने के लिए कोई नहीं है। इस स्थिति में हम प्रतिवादी राज्य और इसके अधिकारियों को राज्य सरकार द्वारा तैयार सात योजनाओं को अधिसूचित करने, असंगठित मजूदरों के लिए राज्य सामाजिक सुरक्षा बोर्ड तुरंत गठित करने और गुजरात में कार्यरत सभी असंगठित मजदूरों के पंजीकरण के लिए तुरंत कदम उठाने के निर्देश देते हैं। अदालत ने कहा कि एसएसबी का कार्य राज्य सरकार को असंगठित क्षेत्र के मजदूरों के लिए योजनाएं बनाने, उनकी निगरानी करने और जिला स्तर पर कार्यों की समीक्षा करने का होता है। उन्होंने कहा कि एसएसबी मजदूरों के पंजीकरण की प्रगति और कोष संबंधी मामलों पर ही ध्यान देता है। गौरतलब है कि गैरसरकारी संगठन ने 2008 में जनहित याचिका दायर करके गुजरात में मजदूर संबंधी कानून को असरदार तरीके से लागू करने के लिए राज्य सरकार पर निष्कि्रय का आरोप लगाया था।

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