Tuesday, August 16, 2011

केंद्र के स्वयंसेवक करेंगे मनरेगा की निगरानी


नई दिल्ली ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश भारत निर्माण स्वयंसेवकों को अपनी आंख व कान बनाना चाहते हैं, ताकि उन्हें योजनाओं के बारे में जमीनी हकीकत का पता चलता रहे। यही वजह है कि मंत्रालय ने उनकी भर्ती में तेजी लाने के साथ उन्हें मानदेय देने पर भी विचार करना शुरु कर दिया है। इन स्वयं सेवकों को महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के सोशल ऑडिट का दायित्व सौंपा जा सकता है। मंत्रालय ने देश के सभी छह लाख गांवों में स्वयंसेवकों की नियुक्ति की योजना तैयार की है। प्रत्येक गांव में 20 से 25 स्वयंसेवकों नियुक्ति की जाएगी, जिन्हें मुफ्त प्रशिक्षण दिया जाएगा। फिलहाल इन्हें कोई मानदेय नहीं मिलता है। योजना के मुताबिक देश के सभी छह लाख गांवों में स्वयंसेवकों की नियुक्ति की जानी है। शुरुआत में ही अब तक 20 हजार से अधिक स्वयं सेवकों की नियुक्ति की जा चुकी है। रमेश ने स्वयंसेवकों से सीधे संवाद करना शुरु कर दिया है। उन्हें एसएमएस भेजकर केंद्रीय योजनाओं के क्रियान्वयन के बारे में जानकारी मांगी गई है। केंद्रीय मंत्री जयराम रमेश ने इन कार्यकर्ताओं से मुफ्त कार्य कराने की बजाय उन्हें कुछ मानदेय देने का भरोसा दिया है। अब तक विभिन्न राज्यों में 20 हजार स्वयं सेवकों की भर्ती हो चुकी है। जबकि अगले चार महीनों में इतने ही स्वयं सेवकों की नियुक्ति कर जाएगी। स्वयं सेवकों की भर्ती में तेजी लाने के बारे में जयराम रमेश ने बताया कि देश के नक्सल प्रभावित 60 जिलों में इस योजना पर प्राथमिकता से अमल किया जाएगा। इन जिलों के शत प्रतिशत गांवों में जल्दी से जल्दी स्वयंसेवकों की नियुक्ति की जाएगी। लेकिन योजना के प्रथम चरण में नक्सल प्रभावित राज्य छत्तीसगढ़, झारखंड और उड़ीसा में स्वयंसेवकों की भर्ती का हाल संतोषजनक नहीं है। साथ ही इन कार्यकर्ताओं का सहयोग स्वच्छ पेयजल और पूर्ण स्वच्छता अभियान में ज्यादा से ज्यादा लिया जाएगा। इनमें गांव के बेरोजगार युवकों की भर्ती की जाएगी। मनरेगा के प्रशासनिक मद से इनके लिए कुछ मानदेय देने पर विचार किया जा रहा है। इसके लिए उनसे सोशल ऑडिट कराया जा सकता है।


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