Wednesday, November 23, 2011

चेतावनी के साथ यूपी को मिले 1200 करोड़


मनरेगा में भ्रष्टाचार को लेकर केंद्र व राज्य सरकार में मची रार के बीच ग्रामीण विकास मंत्रालय ने मंगलवार को उत्तर प्रदेश सरकार को कड़ी चेतावनी के साथ 1200 करोड़ की एक और किश्त जारी कर दी। केंद्र ने सख्त लहजे में कहा है कि चालू वित्त वर्ष की अंतिम किश्त के लिए राज्य को दागी अफसरों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित करनी ही होगी। कार्रवाई की सूची हर हाल में 10 दिसंबर तक केंद्र को सौंपनी होगी। केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश ने राज्य सरकार को लिखे पत्र के साथ यह चेतावनी जारी की है। उत्तर प्रदेश को चालू वर्ष के दौरान 1200 करोड़ रुपये की यह तीसरी किश्त है। जयराम ने राज्य सरकार को पूरे साल का ब्योरा देते हुए भ्रष्ट और अनियमितता करने वालों के खिलाफ अब तक कार्रवाई न करने पर जमकर कोसा भी है। मनरेगा में भ्रष्टाचार पर घुली कड़वाहट के बाद भी केंद्र योजना की किश्तें रोकने की हिम्मत नहीं जुटा सका है। जयराम ने मायावती को लिखे अपने पहले पत्र में भी कहा था कि मनरेगा के भ्रष्टाचार की सीबीआइ जांच ही एकमात्र विकल्प है। वह भ्रष्टाचार ग्रस्त जिलों के आवंटन को रोक भी सकते हैं, लेकिन इससे सिर्फ गरीबों का नुकसान होगा। हालांकि केंद्र सरकार के इस रुख को राज्य में विधानसभा चुनाव के मद्देनजर राजनीतिक मजबूरी से जोड़कर देखा जा रहा है। यही वजह है कि जयराम ने उत्तर प्रदेश के ग्रामीण विकास मंत्री दद्दू प्रसाद को लिखे पत्र में उनसे कहा है कि सार्वजनिक धनराशि में घपला और घोटाला करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। सार्वजनिक पारदर्शिता और जवाबदेही के मद्देनजर लंबित शिकायतों पर कार्रवाई होनी चाहिए। जयराम ने दद्दू प्रसाद को चेतावनी के लहजे में लिखा है कि मनरेगा कार्यक्रम के लिए केंद्रीय मदद की अगली किश्त लेने के पहले राज्य सरकार को अपने आश्वासनों को पूरा करना होगा। यानी पूरी कार्रवाई सुनिश्चित करनी होगी। तथ्य यह है कि पिछले वित्त वर्ष 2010-11 के दौरान उत्तर प्रदेश को मनरेगा के मद 5267 करोड़ रुपये की केंद्रीय मदद उपलब्ध कराई गई थी। जबकि चालू वित्त वर्ष 2011-12 के दौरान अब तक राज्य को पहली किश्त के रूप में 1000 करोड़, दूसरी किश्त 1349 करोड़ और तीसरी किश्त 1200 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं।

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