पंजाब अर्बन डवलपमेंट अथारिटी (पुडा) द्वारा बेघरों को 25-25 गज के प्लाट आवंटन में फर्जीवाड़ा हुआ है। पुडा ने खुद ही उजाड़े गए लोगों की सूची को नजरंदाज कर अज्ञात लोगों को प्लाट आवंटित कर दिए। इनमें सैकड़ों लोग ऐसे हैं जो बठिंडा में नहीं बल्कि यूपी, बिहार, राजस्थान व मध्य प्रदेश में रह रहे हैं। उन्हें अलाट किए प्लाटों में दस साल से उजाड़े से प्रभावित दूसरे परिवार रह रहे हैं। आरटीआइ के तहत यह खुलासा हुआ है। 2001-02 में पुडा ने विकास के नाम पर माडल टाउन,शास्त्री नगर और बेअंत नहर में छह सौ मकान व छह सौ झुग्गियों को तोड़ा था। पीडि़तों ने आक्रोश जताया तो तत्कालीन मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने 2004, 05 व 06 में तीन बार पीडि़त परिवारों का सर्वे कराया और 1,296 परिवारों को चिन्हित किया, जिन्हें 25-25 गज के प्लाट आवंटित करने पर सहमति बनी। पुडा ने प्लाट काटकर प्रति परिवार से 250 रुपये के डिमांड ड्राफ्ट के साथ आवेदन मांगे। अकाली भाजपा गठबंधन सत्ता में आने के बाद भी गरीबों प्लाट नहीं मिल सके। जानकारी के अनुसार, 2000 से 2009 तक 25-25 गज की 502 साइटें अलाट की जा चुकी हैं। कुल 1,296 में से लगभग 1057 लोगों को अलोकेशन लेटर जारी हो चुके हैं। 239 को अलोकेशन लेटर जारी नहीं हुआ। इसमें भी कई गड़बड़ी है। पुडा के अनुसार 502 लोगों को प्लाट अलाट कर दिया है, लेकिन अलाटमेंट सूची व सर्वे सूची के हिसाब से महज 204 ही ऐसे लोग हैं, जो प्रभावितों की श्रेणी में आते हैं। उनमें से लगभग 50 परिवार इस वक्तउनके नाम से अलाट प्लाट पर काबिज नहीं है।
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