Saturday, June 4, 2011

कैसे मिले लाभ, गांव पहले ही अधिग्रहीत



नोएडा व ग्रेटर नोएडा के अधिकांश गांवों में जमीन अधिग्रहण की कार्रवाई पूरी हो चुकी है। कुछ ही गांव ऐसे बचे हैं, जिनमें अधिग्रहण होना शेष है। जिन गांवों में अधिग्रहण हो चुका है, उनमें नई नीति का लाभ नहीं मिलेगा। इसका लाभ ग्रेटर नोएडा फेस-दो व यमुना एक्सप्रेस वे के किसानों को अधिक होगा। ग्रेटर नोएडा के जिन एक दर्जन गांवों में गत माह धारा-4 की कार्रवाई की गई थी, उन्हें नीति का लाभ मिलेगा। सरकार ने नई अधिग्रहण नीति को 2 जून से लागू किया है। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण 113 गांवों में से लगभग 80 गांवों की जमीन अधिग्रहित कर चुका है। यहीं स्थिति नोएडा प्राधिकरण क्षेत्र की है। प्राधिकरण अब ग्रेटर नोएडा फेस-दो में 177 गांवों की जमीन अधिग्रहित करेगा। यमुना प्राधिकरण क्षेत्र में भी भट्टा पारसौल, मुतैना, आछ़ेपुरा, ठसराना, निलौनी-मिर्जापुर, शाहपुर, मूंज खेड़ा, ऊंची दनकौर, रुस्तमपुर, जगनपुर-अफजलपुर आदि एक दर्जन गांवों में जमीन अधिग्रहित हो चुकी है। इन गांवों के किसानों को नई नीति का लाभ नहीं मिलेगा। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने गत माह वैदपुरा, रोजा जलालपुर, जान समाना व चिपियाना बुजुर्ग में धारा-4 की कार्रवाई की थी। इनमें अभी धारा-6 की कार्रवाई नहीं हुई है। प्राधिकरण सादुल्लापुर, जलपुरा, मिलक, खोदना कला, सुनपुरा, खेड़ी-भनौता, हल्दोनी व भूड़ा रावल में धारा-4 की कार्रवाई करने जा रहा है। अधिकारिक सूत्रों के अनुसार इन सब गांवों में नई नीति का किसानों को लाभ मिलेगा। भट्टा पारसौल के ग्रामीणों में नई नीति को लेकर उत्साह नहीं भूमि अधिग्रहण को लेकर भट्टा पारसौल के किसानों में पनपे असंतोष के कारण पूरे प्रदेश में नई जमीन अधिग्रहण की नीति लागू हो गई। इसका फायदा जमीन अधिग्रहण से प्रभावित प्रदेश भर के किसानों को मिलेगा। वहीं नई नीति को लेकर भट्टा पारसौल के किसानों में कोई उत्साह नहीं है। किसान अभी नीति को लेकर असंमजस की स्थिति में है। इन गांवों के ज्यादातर किसानों ने मुआवजा उठा लिया है। इसलिए वे नई नीति का लाभ नहीं उठा सकेंगे। लखनऊ की पंचायत से लौटने के बाद भी उनमें खुशी देखने को नहीं मिल रही है। वेद प्रकाश शर्मा का कहना है कि नई नीति में किसान खेतिहर मजदूरों के लिए कोई योजना नहीं है। उनके सामने जीविका का संकट पैदा हो गया है। जय प्रकाश का कहना है कि जमीन अधिग्रहण को लेकर आंदोलन किया गया लेकिन इसका लाभ आसपास के ग्रामीणों को नहीं मिल पा रहा है। नई नीति कई ऐसे बात है जिनको लेकर लेकर संशय बना हुआ है। सत्यवीर का कहना है कि नई नीति उन किसानों को भी शामिल किया जाना चाहिए था जिनकी जमीन का अधिग्रहण हो चुका है, जमीन छीन जाने पर उनके बच्चे बेरोजगार हो गए है, उनके रोजगार के लिए कोई प्रावधान होना चाहिए। श्रीपाल का कहना है कि गांव के गरीब परिवार को दो जून की रोटी कास्तकारों के कार्यो से मिलती थी। ऐसे परिवारों को नई व पुरानी नीति के साथ आवास, रोजगार, पीडि़तों को मदद मिले।

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