पूर्वी राज्यों में बढ़े रोजगार के मौकों की वजह से पंजाब को उद्योगों और खेतीबाड़ी में मजदूरों की कमी बढ़ने लगी है। केंद्र सरकार के फ्लैगशिप कार्यक्रमों और राज्यों द्वारा उसे प्रभावी ढंग से लागू किए जाने की वजह से बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश व ओडिशा से पंजाब की ओर रुख करने वाले मजदूर कमोबेश अपने-अपने इलाकों में ही रुकने लगेहैं। बाहरी मजदूरों की कमी का यह आलम पंजाब में तब है, जब देश में यह एकमात्र ऐसा राज्य है जहां सरकार द्वारा प्रवासी मजदूर भलाई बोर्ड स्थापित किया हुआ है। पूरी तरह से अनस्किल्ड या सेमी स्किल्ड लेबर पर निर्भर रहने वाले पंजाब के किसानों के लिए बाहरी राज्यों से शॉर्ट टर्म पलायन पर आने वाले मजदूर बड़ी राहत प्रदान करते थे। इन्हीं मजदूरों के दम पर पंजाब के किसानों ने देशभर में खुद को अन्नदाता कहलवाया और इसे कायम भी रखा। धीरे-धीरे पंजाब के ग्रामीण परिदृश्य से स्थानीय खेतीहर मजदूर गायब होते गए और वह अन्य सहायक धंधों में विलीन हो गए। दरअसल, मनरेगा के तहत अन्य राज्यों के साथ-साथ बिहार में ही वहां के लोगों को रोजगार मिलना और नीतीश सरकार द्वारा बिहार में बहाई गई विकास की बयार ने भी मजदूरों को अपने घरों के आसपास रोकने में प्रबल भूमिका निभाई। यही कारण है कि पिछले तीन-चार सालों में ही धान की बुआई के भाव 800 रुपये प्रति एकड़ से वेल्यू एडेड सुविधाओं के साथ 1800 प्रति एकड़ भी पार कर चुके हैं। पंजाब राज्य प्रवासी मजदूर भलाई बोर्ड के चेयरमैन आरसी यादव भी इस बात को कबूल करते हैं कि राज्य में लगातार लेबर की कमी हो रही है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार मजदूरों को सुविधाएं मुहैया कराकर यहां रोजगार हासिल करने को लाने के लिए प्रयासरत है। लुधियाना हैंडटूल एसोसिएशन के एससी रलहन के मुताबिक, इस समस्या से निपटने के लिए सरकार को चाहिए कि वह मनरेगा जैसी स्कीम लाने की बजाये, लोगों को स्किल्ड बनाने का प्रयास करे। इसके लिए स्किल्ड डेवेलपमेंट सेंटर बनाए जाएं। पंजाब की इंडस्ट्री में स्किल्ड लोगों की भारी डिमांड है। इसलिए यहां बेरोजगारी भत्ता देने की बजाए सरकार ट्रेनिंग पर खर्च करे। एक अन्य उद्यमी गुरमीत कलार का कहना है कि सरकार को अगर इंडस्ट्री को प्रफुल्लित करना है, तो इसके लिए इंडस्ट्री की जरूरतों को समझते हुए ट्रेनिंग कोर्स आरंभ करने होंगे। बेरोजगारी भत्ता व मनरेगा जैसी स्कीमों को लाने की बजाये, आइटीआइ में इंडस्ट्री की डिमांड वाले कोर्स आरंभ किए जाने जरूरी हैं। इंडस्ट्री हर किसी को 365 दिन का रोजगार देने की क्षमता रखती है।
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