गोंडा जिले में मनरेगा के तहत प्रतिबंधित इंटरलॉकिंग के मामले में एक करोड़ रुपये की रिकवरी का आदेश बुधवार को जारी हो गया। यह वसूली बभनजोत ब्लॉक के बीडीओ, एडीओ पंचायत, कार्यप्रभारी, तकनीकी सहायक व सहायक लेखाकार से की जानी है। इनके खिलाफ गबन की तहरीर खोड़ारे पुलिस को दी गई है। मनरेगा धन के गबन के आरोप में उक्त ब्लॉक के तकनीकी सहायक को बर्खास्त कर दिया गया। कार्यप्रभारी बोरिंग टेक्नीशियन को भी निलंबित कर दिया गया। सहायक लेखाकार के निलंबन की संस्तुति शासन को भेजी गई है। बभनजोत ब्लॉक को वर्ष 2011-12 में मनरेगा में एक करोड़ 93 लाख रुपये डीआरडीए ने दिए। बीडीओ ने प्रतिबंधित इंटरलॉकिंग का कार्य करा दिया। इस मामले में बीडीओ रामजीत प्रसाद व एडीओ पंचायत रंग बहादुर सिंह को निलंबित कर दिया गया। इसके बाद संबंधित कार्यो की जांच तीन अधिशासी अभियंताओं की टीम से कराई गई। जांच में पाया गया कि पंद्रह परियोजनाओं पर बगैर कार्य कराये 40 लाख रुपये निकाल लिए गए। अन्य परियोजनाओं पर 57 लाख रुपये से अधिक का भुगतान किया गया। इंटरलॉकिंग की ईट की गुणवत्ता ठीक नहीं मिली। अन्य दो परियोजनाओं पर भी अधिक धन का भुगतान हुआ। बुधवार को डीएम राम बहादुर ने गबन की रिपोर्ट लिखाने व रिकवरी का आदेश परियोजना निदेशक डीआरडीए को दिया। सहायक लेखाकार चंद्रिका प्रसाद जायसवाल के निलंबन की संस्तुति शासन को भेज दी। परियोजना निदेशक विवेक त्रिपाठी ने तकनीकी सहायक हीरालाल को तत्काल प्रभाव से बर्खास्त कर दिया। कार्यप्रभारी बोरिंग टेक्नीशियन सुशील कुमार को निलंबित कर दिया गया है।
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