प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने शहरी विकास योजनाओं में गरीबों के लिए घर बनाने पर बल दिया है और आर्थिक रूप से कमजोर व कम आय वर्ग के लोगों के आवास ऋण पर सरकारी गारंटी के लिए जल्दी ही 1,000 करोड़ रुपए का एक सरकारी गारंटी कोष स्थापित करने का भरोसा दिया है। प्रधानमंत्री मनामोहन सिंह ने मंगलवार को यहां जवाहरलाल नेहरू राष्ट्रीय शहरी नवीनीकरण मिशन (जेएनयूआरएम) पर राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए कहा, ‘शहरी विकास की किसी भी रणनीति में गरीबों के लिए आवासीय सुविधाओं का विकास बहुत जरूरी है।’ प्रधानमंत्री ने कहा कि नगर नियोजकों को सोच का पुराना ढर्रा छोड़ना होगा। पुरानी वृहद योजनाओं में गरीबों के आवास और रोजगार की जरूरतों पर ध्यान नहीं दिया जाता था। उन्होंने कहा गरीबों के लिए आवासीय सुविधाओं के विकास को विकास शहरी विकास की किसी भी रणनीति का अहम हिस्सा बनाना होगा। प्रधानमंत्री ने घोषणा की कि इसी वित्त वर्ष में सरकार गरीबों को कर्ज की सुविधा दिलाने के लिए 1,000 करोड़ रुपए का एक क्रेडिट रिस्क गारंटी कोष स्थापित करेगी। उन्होंने शहरी गरीबों को खुद का आवास सुलभ कराने और शहरों को मलिन बस्तियों से मुक्त बनाने के लिए केंद्र सरकार द्वारा इसी साल शुरू की गई राजीव आवास योजना की सफलता के लिए गरीबों को बैंक ऋण की सुविधा दिलाना बहुत जरूरी है। सिंह ने कहा,‘बैंकों को आर्थिक रूप से कमजोर वगरे और निम्न आयवर्ग वाले समूह के लोगों को पर्याप्त मात्रा में ऋण सहायता देने को प्रोत्साहित करने के लिए हम चालू वित्त वर्ष में ही 1,000 करोड़ रुपए का एक क्रेडिट रिस्क गारंटी कोष स्थापित करने का विचार कर रहे हैं।’ एक दिन के इस सम्मेलन का आयोजन शहरी विकास और आवास एवं शहरी गरीबी उपशमन मंत्रालय ने मिल कर किया था। सिंह ने जानुरम के अगले चरण में क्षेत्रीय विकास का ‘समन्वित और व्यापक दृष्टिकोण अपनाने पर भी बल दिया। ‘हमें ऐसी स्थिति बनानी चहिए जिसमें शहरी भारत में निवेश बढ़े, विनिर्माण और मूल्यवर्धित सेवा क्षेत्र में रोजगार के अवसर बढें़।’ उन्होंने यह भी कहा कि अगले चरण में नगर निकायों के राजस्व में वृद्धि करना एक बड़ी चुनौती होगी। इस सम्बंध में उन्होंने डा. ईशर अहलुवालिया समिति की सिफारिशों का उल्लेख किया जिसमें नगरपालिकाओं का अलग से कुछ कर लगाने का अधिकार देने के लिए संविधान में संशोधन का भी सुझाव दिया गया है। सिंह ने कहा कि इन सुझावों पर विस्तार से चर्चा की जरूरत है। प्रधानमंत्री ने नगरपालिकाओं की व्यवस्था में सुधार पर जोर देते हुए कहा,‘यह साफ हो चुका है कि शहरों का कायाकल्प करने की जो भी महत्वपूर्ण कड़ियां हैं उनमें शासन प्रशासन की कड़ी सबसे कमजोर है।’
प्रधानमंत्री ने नगरपालिकाओं के शासन प्रशासन में सुधार के लिए नगर नियोजन, प्रबंध तथा वित्त के क्षेत्र में प्रशिक्षण कार्यक्र म चलाने के साथ साथ इंजीनियर तथा चार्टड एकाउंटेंट्स जैसे पेशेवरों की सलाह लेने का सुझाव दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि तीव नगरीकरण स्वाभाविक है। आर्थिक वृद्धि तेज होने से इसकी गति और बढेगी तथा शहरी आबादी मौजूदा 37.7 करोड़ से बढ़कर 2031 तक 60 करोड़ हो जाएगी। उन्होंने कहा,‘महानगरों की योजना पर ध्यान देना बहुत जरूरी हो गया है। इसमें सम्पर्क सुविधाओं का विस्तार, सड़कों, एक्सप्रेसवे- हाईवे और ऊर्जा की बचत करने वाली अच्छी सार्वजनिक परिवहन पण्राली तथा गरीबों के लिए आवास पर ध्यान देना होगा।’
समारोह में शहरी आवास एवं शहरी विकास मंत्री कुमारी शैलजा ने कहा कि शहरों में गरीबों के लिए सस्ते आवास मुहैया कराने की योजना में मुकदमेबाजी से मुक्त जमीन और गरीबों के लिए बैंक ऋण की उपब्धता बड़ी चुनौती है। शहरी विकास मंत्री कमलनाथ ने कहा कि राज्यों के साथ चर्चा के बाद इस मिशन के अगले चरण की योजना 3-4 माह में तैयार कर ली जाएगी।